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NITI Aayog की रिपोर्ट ने खोली शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई | REVIECOM BHARAT NEWS TV
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NATIONAL DESK 📍 Chandigarh | 📅 03-09-2026
TOP STORY शिक्षा, कौशल और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत; Internship, Apprenticeship और Industry-linked education पर जोर।
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NITI Aayog की रिपोर्ट ने खोली शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई, सरकार को उठाने होंगे बड़े कदम
डिग्री, कौशल और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत; सामान्य डिग्रियों को रोजगारपरक बनाने, Internship, Apprenticeship और Industry-linked education पर जोर।
शिक्षा, कौशल और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर।
8.25%
स्नातक अपनी योग्यता से संबंधित रोजगार में
वित्त वर्ष 2024-25
8.7 करोड़
15–29 वर्ष के युवा रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण से बाहर
NEET संदर्भ
BA • B.Sc • B.Com
सामान्य डिग्री और रोजगार का अंतर
प्रमुख चुनौती
DEGREE + SKILL
रोजगारपरक शिक्षा का मॉडल
आगे बढ़ने का रास्ता
!
रिपोर्ट का मुख्य संकेत: भारत में डिग्री प्राप्त करने वाले युवाओं को उनकी शैक्षणिक योग्यता से जुड़े रोजगार तक पहुंचाने के लिए शिक्षा, कौशल और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है।
शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई
भारत में हर साल लाखों युवा कॉलेज और विश्वविद्यालयों से डिग्री लेकर निकलते हैं। लेकिन बड़ी चुनौती यह है कि डिग्री मिलने के बाद उन्हें अपनी पढ़ाई और योग्यता के अनुरूप नौकरी कितनी मिल रही है। NITI Aayog की रिपोर्ट ने इसी समस्या को गंभीरता से सामने रखा है।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में केवल 8.25% स्नातक ही ऐसे रोजगार में थे, जो उनकी शैक्षणिक योग्यता से संबंधित थे। यानी बड़ी संख्या में युवा ऐसी नौकरियां कर रहे हैं, जिनका उनकी डिग्री से सीधा संबंध नहीं है। BA, B.Sc और B.Com जैसी सामान्य डिग्रियों और रोजगार बाजार के बीच कमजोर संबंध को रिपोर्ट में प्रमुख चुनौती बताया गया है।
यह स्थिति सिर्फ युवाओं के करियर का सवाल नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, उत्पादकता और मानव संसाधन के बेहतर इस्तेमाल से भी जुड़ी हुई है।
आखिर समस्या कहां है?
भारत में उच्च शिक्षा का विस्तार तेजी से हुआ है। बड़ी संख्या में युवा स्नातक और उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन शिक्षा के दौरान मिलने वाला ज्ञान और कंपनियों को चाहिए कौशल कई बार एक-दूसरे से मेल नहीं खाते।
कई पारंपरिक पाठ्यक्रमों में व्यावहारिक प्रशिक्षण, इंडस्ट्री एक्सपोजर, आधुनिक तकनीक और वास्तविक कार्यस्थल की जरूरतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।
नतीजा यह होता है कि युवा डिग्री तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन नौकरी के लिए उन्हें अलग से स्किल ट्रेनिंग करनी पड़ती है।
NITI Aayog के आंकड़ों के मुताबिक, 15 से 29 वर्ष की उम्र के करीब 8.7 करोड़ युवा रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण से बाहर हैं।
सरकार क्या कदम उठा सकती है? हमारे सुझाव
नीचे दिए गए सुझाव रिपोर्ट में सामने आए शिक्षा, कौशल और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत को ध्यान में रखते हुए Reviecom Bharat News TV की ओर से प्रस्तुत किए गए हैं। इनका उद्देश्य डिग्री को रोजगारपरक बनाने, युवाओं को practical exposure देने और education system को industry की बदलती जरूरतों से जोड़ने पर जोर देना है।
01
हर डिग्री को रोजगार से जोड़ना होगा
विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम की नियमित समीक्षा हो। BA, B.Sc और B.Com जैसे पाठ्यक्रमों में रोजगार और उद्योग की जरूरतों से जुड़े विषय और मॉड्यूल जोड़े जा सकते हैं। उदाहरण: B.Com + GST, Accounting Software, Digital Finance, Data Analysis; B.Sc + Data Science, Laboratory Skills, Industry Applications; BA + Digital Communication, Content, Research, Public Policy.
02
कॉलेजों में Internship और Apprenticeship
कॉलेज स्तर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जाए। विद्यार्थी पढ़ाई के दौरान कंपनियों, MSME, स्टार्टअप, सरकारी संस्थानों और अन्य संगठनों के साथ काम का अनुभव प्राप्त करें।
03
Industry और Universities के बीच मजबूत साझेदारी
उद्योग और विश्वविद्यालयों के बीच मजबूत partnership framework तैयार किया जाए। अगले 5-10 वर्षों की skill जरूरतों के आधार पर courses और training programmes विकसित किए जा सकते हैं।
04
हर कॉलेज में Career & Skill Centre
Dedicated Career & Skill Centre में career guidance, skill testing, placement support, resume और interview preparation तथा internship/apprenticeship opportunities की जानकारी दी जाए।
05
सरकारी Skill Schemes को कॉलेजों से जोड़ना
कौशल विकास योजनाओं को कॉलेज विद्यार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए और Degree के साथ industry-recognised skill certification का अवसर मिले।
06
District-Level Skill Mapping
हर जिले में स्थानीय रोजगार और व्यवसाय के अवसरों की पहचान कर Manufacturing, Healthcare, Tourism, IT/ITES, Agriculture Processing, Logistics और Renewable Energy जैसे क्षेत्रों के अनुसार training programmes विकसित किए जाएं।
07
Teachers को भी Industry Training
शिक्षकों को समय-समय पर industry और technology से जुड़ी training दी जाए, ताकि वे रोजगार बाजार की बदलती जरूरतों के अनुसार विद्यार्थियों को बेहतर तैयार कर सकें।
08
Degree + Skill का नया मॉडल
विद्यार्थी को Degree के साथ रोजगारपरक skill specialization मिले। जैसे BA + Digital Marketing, B.Com + GST & Accounting, B.Sc + Data Analytics, BA + Content & Communication, B.Com + Banking & Financial Services.
09
कंपनियों को Apprenticeship के लिए प्रोत्साहन
खासकर MSME और छोटे उद्योगों के लिए आसान apprenticeship framework बनाया जा सकता है, ताकि वे युवाओं को training और शुरुआती work experience दे सकें।
10
College Placement की Quality भी मापी जाए
सिर्फ placement संख्या नहीं, बल्कि qualification से संबंधित नौकरी, शुरुआती salary, 1-2 साल बाद retention, जरूरी skills और apprenticeship जैसे indicators भी देखे जाएं।
11
Entrepreneurship को बढ़ावा
कॉलेजों में startup incubation, business mentoring, financial literacy और छोटे व्यवसाय शुरू करने की practical training दी जा सकती है, ताकि युवा रोजगार पैदा करने वाले भी बनें।
12
NEET युवाओं के लिए विशेष अभियान
15 से 29 वर्ष के करीब 8.7 करोड़ युवाओं को district-level outreach के जरिए उनकी शिक्षा, रुचि और स्थानीय रोजगार अवसरों के आधार पर education, skill training, apprenticeship या employment से जोड़ा जा सकता है।
13
Skill की जानकारी स्कूल स्तर से
कक्षा 9-10 से career options, vocational education, emerging jobs और आवश्यक skills की जानकारी दी जा सकती है।
14
रोजगार के आंकड़ों की बेहतर निगरानी
अलग-अलग डिग्री और courses के employment outcomes को लगातार track कर कमजोर outcomes वाले courses में सुधार किया जा सकता है।
सरकार के लिए संभावित 5 प्राथमिक कदम
01. हर डिग्री को रोजगारपरक skills से जोड़ना।
02. कॉलेजों में internship और apprenticeship बढ़ाना।
03. Industry-led curriculum और practical training लागू करना।
04. हर जिले में रोजगार की मांग के अनुसार skill programmes तैयार करना।
05. डिग्री के साथ career guidance और industry-recognised certification को बढ़ावा देना।
सबसे जरूरी सुधार क्या होना चाहिए?
NITI Aayog की रिपोर्ट से एक बात साफ है—भारत को केवल “Degree Economy” से “Skill and Employment Economy” की तरफ बढ़ना होगा।
युवाओं को यह भरोसा होना चाहिए कि जिस शिक्षा पर वे कई वर्ष और परिवार की बड़ी राशि खर्च कर रहे हैं, वह उन्हें आगे रोजगार या व्यवसाय के लिए वास्तविक रूप से तैयार करेगी।
इसके लिए सरकार, विश्वविद्यालय, कॉलेज, उद्योग और विद्यार्थियों—सभी को मिलकर काम करना होगा।
निष्कर्ष
भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी में से एक है। यह युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बन सकती है, लेकिन इसके लिए शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी कम करना जरूरी है।
NITI Aayog की रिपोर्ट इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण चेतावनी देती है। अगर युवा डिग्री तो हासिल कर रहे हैं, लेकिन उनकी पढ़ाई रोजगार से नहीं जुड़ रही, तो अब शिक्षा व्यवस्था के मॉडल पर गंभीरता से पुनर्विचार करने का समय है।
भविष्य की शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जहां “डिग्री के बाद नौकरी की तलाश” नहीं, बल्कि “डिग्री के दौरान ही रोजगार की तैयारी” शुरू हो जाए।
महत्वपूर्ण सूचना / अस्वीकरण (Disclaimer): यह सामग्री सामान्य सूचना और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। इसमें दिए गए आंकड़े और जानकारी उपलब्ध स्रोतों और रिपोर्टिंग पर आधारित हैं। सरकार के लिए बताए गए कदम संभावित/सुझावित उपाय हैं, आधिकारिक सरकारी घोषणाएं नहीं। किसी भी निर्णय से पहले संबंधित आधिकारिक दस्तावेज और मूल रिपोर्ट की पुष्टि करें।